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Amavasya Shraddha period: Significance of Pitra Visarjan and Sarva Pitru Amavasya

City: New York

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Amavasya Shraddha period: Significance of Pitra Visarjan and Sarva Pitru Amavasya

Category: Vehicles

Amavasya Shraddha period: Significance of Pitra Visarjan and Sarva Pitru Amavasya

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* अमावस्या श्राद्ध पक्ष: पितृ विसर्जन और सर्व पितृ अमावस्या का महत्व*

हिंदू धर्म में *श्राद्ध पक्ष* (जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है) एक महत्वपूर्ण कालावधि है, जो पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए समर्पित होती है। यह पक्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है, जो कुल 15 दिनों का होता है। इस अवधि में प्रत्येक तिथि पर अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। लेकिन *अमावस्या* इस पक्ष का अंतिम और सबसे विशेष दिन होता है, जिसे *सर्व पितृ अमावस्या* या *पितृ विसर्जन अमावस्या* के नाम से जाना जाता है। इस दिन सभी पितरों—चाहे उनकी मृत्यु तिथि ज्ञात हो या न हो—का श्राद्ध करने का विधान है। आइए, इसकी विस्तृत जानकारी समझते हैं।

* श्राद्ध पक्ष का अवलोकन *
श्राद्ध पक्ष की शुरुआत *पूर्णिमा श्राद्ध* से होती है, जब पितर पृथ्वी पर आते हैं। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वज अपने वंशजों का आशीर्वाद देते हैं। पक्ष के दौरान:
- *प्रतिदिन श्राद्ध*: मृत्यु तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है।
- *नियम*: शुद्ध भोजन, दान-पुण्य, तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) से परहेज, और ब्राह्मण भोजन कराना अनिवार्य।
- *फल*: इससे पितृ दोष निवारण होता है, वंश वृद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है।

श्राद्ध पक्ष का समापन *अमावस्या* पर होता है, जब पितरों को विदाई दी जाती है। पुराणों में वर्णन है कि इस दिन पितर अपने लोक लौट जाते हैं, और श्राद्ध से उन्हें मोक्ष मिलता है।

* सर्व पितृ अमावस्या: तिथि और महत्व
*सर्व पितृ अमावस्या* आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ती है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। वर्ष 2025 में, यह तिथि *21 सितंबर* (आज) को है। इस दिन विशेष रूप से उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है:
- जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो।
- अमावस्या, पूर्णिमा या चतुर्दशी को मृत्यु हो गई हो।
- नाना-नानी या अन्य ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का।

*महत्व*:
- *पितृ मोक्ष*: श्राद्ध से पितरों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
- *सर्वपितृ*: सभी पितरों (सर्व) का तर्पण, इसलिए नाम।
- *दान-पुण्य*: इस दिन दान (अन्न, वस्त्र, जल) करने से पुण्य फल मिलता है।
- *विशेष योग*: कभी-कभी दुर्लभ योग बनते हैं, जो श्राद्ध का फल दोगुना करते हैं।

हिंदू शास्त्रों (जैसे छांदोग्य उपनिषद) में कहा गया है कि पितरों का तर्पण करने से वंशजों को कल्याण प्राप्त होता है।

* श्राद्ध विधि: कैसे करें तर्पण और पिंडदान
सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध नदी तट, सरोवर या घर पर किया जा सकता है। विधि सरल लेकिन पवित्र होनी चाहिए।

* तैयारी*
- *स्नान*: प्रातः सूर्योदय से पहले गंगाजल या पवित्र जल से स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- *स्थान*: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। कुशा घास, जल कलश और पिंड सामग्री रखें।

*# मुख्य विधि*
1. *संकल्प*: "अमावस्या श्राद्ध पक्ष में पितरों की शांति के लिए..." संकल्प लें।
2. *पिंडदान*: चावल, जौ, तिल से बने पिंड बनाएं। इन्हें पितरों को अर्पित करें।
3. *तर्पण*: जल में काले तिल, जौ मिलाकर दक्षिण दिशा में उंडेलें। गायत्री मंत्र का जाप करें।
4. *भोजन*: खीर-पूड़ी का भोग लगाएं। ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
5. *दान*: काला तिल, दूध, वस्त्र आदि दान करें।

*मुहूर्त*: कृतिका, रोहिणी, अपराह्न (दोपहर) मुहूर्त शुभ। श्राद्ध दोपहर में करें।

*निषिद्ध*: विवाद, तामसिक भोजन, सूतक (यदि ग्रहण हो तो)।

* सामान्य गलतियां और सावधानियां*
- *तिथि भूलना*: यदि तिथि याद न हो, तो केवल अमावस्या पर ही श्राद्ध न करें; पक्ष भर प्रयास करें।
- *ग्रहण प्रभाव*: 2024 में सूर्य ग्रहण के साथ था, लेकिन सूतक न मानकर श्राद्ध किया गया। 2025 में ऐसा कोई विशेष प्रभाव नहीं।
- *महिलाओं के लिए*: विधवा या अविवाहित भी श्राद्ध कर सकती हैं, लेकिन पति/पिता के नाम पर।

* निष्कर्ष*
अमावस्या श्राद्ध पक्ष हिंदू संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो वंश परंपरा और कृतज्ञता का प्रतीक है। आज (21 सितंबर 2025) सर्व पितृ अमावस्या पर यदि संभव हो, तो श्राद्ध करें। इससे न केवल पितर प्रसन्न होते हैं, बल्कि परिवार को सुख-समृद्धि मिलती है। यदि तिथि अनुसार श्राद्ध न हो पाया हो, तो यह दिन सर्वोत्तम अवसर है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय पंडित से परामर्श लें।

नोट: तिथियां पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकती हैं; सटीक मुहूर्त के लिए ज्योतिषी से जांचें।

 

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https://www.narayanduttshrimali.com/pitra-dosh-nivaaran

Posted on: 2025-09-21 14:29:58

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